सुविचार 4695
आपके अलावा कोई आपकी परिस्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं है,
_ कोई आपको गुस्सा नहीं दिला सकता और कोई आपको खुश भी नहीं कर सकता.
मुझे भी ऐसा ही लगता था…कि हर परिस्थिति मेरे नियंत्रण में हो… लेकिन सच में…ऐसा होता नहीं है.!!
_ जैसा हो रहा है होने दो.. और आपको जो सही लग रहा है वो करो.!!
जीवन में स्थिति और परिस्थिति के बीच का अंतर उन्हें सिर्फ जान लेने से नहीं, बल्कि इनके बीच से होकर गुज़रने वाले लंबे, खामोश और कभी-कभी दर्द भरे अनुभवों से समझ में आता है..
_ एक ही स्थिति किसी के लिए बोझ बन जाती है, तो किसी के लिए सबक और तभी समझ आता है कि स्थिति बाहर होती है, लेकिन परिस्थिति भीतर जन्म लेती है, हमारी सोच, सब्र और नज़रिये से.!!
कभी-कभी व्यक्ति कुछ भी सोचने या समझने में असमर्थ हो जाता है, ऐसा लगता है जैसे मन अंधकार में डूब गया हो, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि स्थिति हमेशा ऐसी ही रहेगी.
_ अक्सर ऐसा केवल इसलिए होता है.. क्योंकि परिस्थितियाँ कुछ समय के लिए बदल जाती हैं, और ये बदली हुई परिस्थितियाँ व्यक्ति को कुछ समय के लिए थामे रखती हैं ताकि वह स्वयं को और अपनी दिशा को फिर से समझ सके.!!
कुछ परिस्थितियाँ समझने-समझाने से परे होती हैं, और जब यही परिस्थितियाँ हमें भीतर से जकड़ लेती हैं, तो शब्द साथ छोड़ देते हैं..
_ तब न शिकायत बचती है, न सफ़ाई देने की इच्छा..
_ बस एक ख़ामोशी रह जाती है, जो बहुत कुछ कहती है, पर कहने का साहस नहीं करती.!!
मर्यादा में रहकर भी जब आत्मसम्मान न मिले, तो सीमाएँ लांघ कर स्वाभिमान को आगे रखना अनुचित नहीं है, फिर परिस्थितियाँ कैसी भी हों, कभी-कभी खुद का चुनाव करना ही सही डिसिजन होता है.!!
– Tanveer




