सुविचार 4870

अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधारी जाये,

तो यह उससे कहीं अच्छा है की कोई दूसरा उसे सुधारे !!

सुविचार 4869

जीवन एक प्रयोगशाला है, जिसमें सुख दुःख के मिश्रण से अनुभवों की खोज होती है.

सुविचार 4868

इस पल की गुणवत्ता जीवन की गुणवत्ता तय करती है.

यदि यह जीवन है, तो इस पल की सार्थकता जीवन की सार्थकता है.

सुविचार 4867

जिंदगी के अंतिम पलों में …..अपने पूरे जीवन का …

एक एक कर्म, एक फिल्म…. की तरह अपनी निगाहों ….के सामने झलकेगा …..

कोशिश करें कि ….अपनी फिल्म सबके देखने लायक हो …

सुविचार 4865

थके हारे लोग अपने चारों तरफ मिल जाते हैं,

मगर आत्मविश्वासी व सकारात्मक लोग ही डूबती नाव को बचा पाते हैं.

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