सुविचार 4870
अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधारी जाये,
तो यह उससे कहीं अच्छा है की कोई दूसरा उसे सुधारे !!
तो यह उससे कहीं अच्छा है की कोई दूसरा उसे सुधारे !!
यदि यह जीवन है, तो इस पल की सार्थकता जीवन की सार्थकता है.
एक एक कर्म, एक फिल्म…. की तरह अपनी निगाहों ….के सामने झलकेगा …..
कोशिश करें कि ….अपनी फिल्म सबके देखने लायक हो …
मगर आत्मविश्वासी व सकारात्मक लोग ही डूबती नाव को बचा पाते हैं.