सुविचार 4693

किसी भी संस्थान, को मनुष्यों, की जरुरत, नहीं होती है,,,बल्कि,

काम करने वालों, की तलाश, रहती है..,

सुविचार 4692

दो हिस्सों में बंटी है ” ज़िंदगी सारी “

अभी उम्र नहीं है और अब उम्र नहीं है..

सुविचार 4691

आपकी “अच्छाइयां”…बेशक अदृश्य हो सकती हैं..

लेकिन इनकी छाप…हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है..

सुविचार 4690

जब तक मन में लालच, स्वार्थ, ईर्ष्या, नफरत पलते रहेंगे__शांति कभी नहीं मिलेगी..

जब ये बात हम सभी जानते हैं__ तो फिर मानते क्यों नहीं ..?

सुविचार 4689

दिल की किताब को बारीक़ी से पढ़े बिना महज़ किताबें पढ़ते रहना किसी काम का नहीं.
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