मस्त विचार 4747
मैं चरागों की भला, कैसे हिफाज़त करता…!
वक़्त सूरज को भी हर रोज़ बुझा देता है….!!
वक़्त सूरज को भी हर रोज़ बुझा देता है….!!
जिनको ठोकरों से बचना सिखाया..
और कोई न साथ देने को तैयार और न हाथ थामने को..
तुमको अपने आप ही … सहारा मिल जाएगा
कश्ती कोई डूबती … पहुँचा दो किनारे पे
तुमको अपने आप ही किनारा मिल जाएगा..
तबाह करने का हौसला भी रखता हूं..
मैंने कहा – यही तो खराबी है…