मस्त विचार 4789
अच्छा हुआ बड़ी जल्दी बदल गए तुम,
वरना मेरी उम्मीद बढ़ती ही जा रही थी..
वरना मेरी उम्मीद बढ़ती ही जा रही थी..
#बस_ तू _साथ_दे_मेरा_मैं_अकेला_ही_काफी_हूँ..
कर्म की शाख को भी हिलाना पड़ता है..
सोच रहा हूँ _ जब मिले थे तो _ कौन सा हुनर था मुझमें..
मैं स्नेह का धागा हूँ _ मजबूरी की जंजीर नहीं..!!