मस्त विचार 4795
जीवन बहुत सारी बातों का अधूरा छूट जाना है, किंतु मेरे पास शोक का समय नहीं..
जब मैं समंदर नहीं देख पाता, आसमान को देखने लगता हूँ…
जब मैं समंदर नहीं देख पाता, आसमान को देखने लगता हूँ…
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
बुझ जाऊँगा किसी रोज़, सुलगते सुलगते…।
साँसों का भी कोई हिसाब रखता है क्या !!
आप भी कभी मुझे अपनाते तो अच्छा लगता !!