मस्त विचार 4798
मैं शामिल नहीं हूँ उनमें _ जो रास्ते दिखाने का _ दम तो भरते हैं,
किंतु _ उन रास्तों पर कभी ख़ुद नहीं दिखते
किंतु _ उन रास्तों पर कभी ख़ुद नहीं दिखते
कहीं ऐसा ना हो कि पूछना पड़ जाए, ” कैसे हो गया …! “
फिर उसके रवैये ने सब आसान कर दिया..
जब मैं समंदर नहीं देख पाता, आसमान को देखने लगता हूँ…
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…