मस्त विचार 4810
मंजर धुंधला हो सकता है _ मंजिल नहीं.
दौर बुरा हो सकता है _ जिन्दगी नहीं..
दौर बुरा हो सकता है _ जिन्दगी नहीं..
वक़्त बतायेगा की सोना थे या फ़क़त मिट्टी थे हम.”
काँच टूटता है तो कुछ टुकड़े समेटने में नहीं आते ..!!
तो मैं क्यूँ एक असफलता के बाद सपनों का दामन छोड़ दूँ,,!!!
अब किसी का भी होना नहीं चाहिए.
मेरा दिखना भी गवारा नहीं और नज़र भी मुझ पर ही रखते हैं..