मस्त विचार 4717
सब हो रहा है…..तो लिखना क्या है,
लगता है अब बस पढना ही पढना है..
लगता है अब बस पढना ही पढना है..
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया..
ख़ुद की बताने का मन नहीं करता…
अमीर की बकवास पर भी “हां जी : हां जी” होय..
डरना नही यारा, धीरे धीरे निखर भी रहे हो तुम..
देखना नदियां खुद ही मिलने आएंगी..