मस्त विचार 4740
ये वो ज़माना है जिसकी जितनी परवाह करोगे,
वो उतना ही बेपरवाह होकर मिलेगा.
वो उतना ही बेपरवाह होकर मिलेगा.
ख़्वाब बुनूँ या ख़्वाहिशें रफ़ू करूँ..
अब ना जाने कितने टुकड़ों में बट गया हूं मैं !
उनका अनुभव करो_ क्योंकि वे आपको ऊंचा उठाने आए हैं…
दुख देकर भी सवाल करते हैं..!