मस्त विचार 4841
ज़रूरतें, जिम्मेदारियां, और ख़्वाहिशें,
यूँ ही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है…
यूँ ही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है…
मेरे साथ रहने की तो बात ही छोड़ दो…!!!
वही हम से किनारा कर रहे हैं..
जिन्हें उगना होता है वो पत्थर का सीना चीर कर भी उगते हैं
___ पत्थर तैरते भी हैं _ तो पंख डूबते भी हैं…
_____मगर मैने तेरी जीत में अपनी खुशी ढूंढी !!