मस्त विचार 4164
सबर कर बंदे मुसीबत के दिन भी गुजर जायेंगे,
हंसी उड़ाने वालों के चेहरे भी उतर जायेंगे..
हंसी उड़ाने वालों के चेहरे भी उतर जायेंगे..
कुछ हम से कहा होता कुछ हम से सुना होता.
शाम आती है तो, ढ़ल जाने को जी चाहता है.
हमने बारिश में भी जलते हुए मकान देखे हैं.!!
दर्द लिखता हुँ किसी को देता तो नही..!
दूसरा कोई जिम्मेदार नहीं होता”