मस्त विचार 4842
जो कुछ भी था सब कुछ खो चुका हूं मैं,
करके सबका भला, अब बुरा बन चुका हूं मैं..
करके सबका भला, अब बुरा बन चुका हूं मैं..
यूँ ही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है…
मेरे साथ रहने की तो बात ही छोड़ दो…!!!
वही हम से किनारा कर रहे हैं..
जिन्हें उगना होता है वो पत्थर का सीना चीर कर भी उगते हैं
___ पत्थर तैरते भी हैं _ तो पंख डूबते भी हैं…