मस्त विचार 4868
पता नहीं कि तुम सच में इतने अच्छे हो, _
_ या तुम्हें लेकर मेरा नज़रिया ज़्यादा अच्छा है..
_ या तुम्हें लेकर मेरा नज़रिया ज़्यादा अच्छा है..
जो हमारी आवाज से ही हमारी खुशी और दुख का अंदाज लगा लेते हैं.
_ फिर यूं हुआ कि अब तेरे फ़र्क पड़ने से भी फ़र्क नहीं पड़ता है मुझे…
_ हम लिखते हैं सच और सुकून पाते हैं..
_ पर तुम ये याद रखो तुम कुछ नहीं बहुत कुछ करने वालों में से हो ..
_ अपने प्रत्येक फैसले को सफ़ल बनाने में सक्षम नहीं होता है.