मस्त विचार 4005

तुम इतने भी नादां नहीं हो की ” समझ ” न सको..!!

_ मेरी चंद लाइनों में सिर्फ तेरा ही ” जिक्र ” होता है ..!!!!

मस्त विचार 4004

कितनी दफा मिटाओगे मेरा वजूद,

_ मैं फिर से उग जाऊंगा, तुम देख लेना..

मनुष्य जीवन भर सीखता रहता है;

_ जिस दिन वह सीखना बंद कर देता है, उस दिन से उसका वजूद ठहर जाता है.!!

मस्त विचार 4003

लोगों ने मुझ पर फेंके थे पत्थर जो बेशुमार,

_ मैंने उन्हीं को जोड़कर एक घर बना लिया.

कुछ लोगों की प्रवृत्ति होती डंक मारने की..

_मौका मिलते ही मार देते है …और आप हैरान देखते रह जाते हैं..!!

तैरना सिख लो ज़िन्दगी के समंदर में, डुबाने वाले यहाँ बस मौका देखते हैं.!!
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