मस्त विचार 3953
कोई अपने अज्ञान में भी खुश है तो, ..ज्ञानी दुखी क्यूँ ???
_आधी ख्वाहिशें ज़माना मुकम्मल होने नहीं देता..!!
_समझदारी ने तो बहुत कुछ छीन लिया…
_देता था नया ज़ख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए..!!
रोज़ लिया करते हम थोड़ा थोड़ा..
वे सभी आपकी गलतियाँ नोटिस करते हैं..
_पर वो ‘काश’ जब सच में तब्दील होता है तो लगता है कि वो काश ‘काश’ ही रह जाता.
_ “पार” करना है या “इंतेज़ार” करना है..