मस्त विचार 3952

आधी ख्वाहिशें हम अपने अंदर ही मार देते हैं,

_आधी ख्वाहिशें ज़माना मुकम्मल होने नहीं देता..!!

आप ज़माना देख लो, मैं इधर ही ठीक हूँ..!!

मस्त विचार 3950

वो जान गया था हमें दर्द में मुस्कुराने की आदत है,

_देता था नया ज़ख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए..!!

मस्त विचार 3949

काश के दर्द का इक पैमाना होता,

रोज़ लिया करते हम थोड़ा थोड़ा..

किसी को आपका दर्द नज़र नहीं आता,

वे सभी आपकी गलतियाँ नोटिस करते हैं..

भी-कभी हम ये फील करते हैँ कि ‘काश’ वह मेरे पास होता.

_पर वो ‘काश’ जब सच में तब्दील होता है तो लगता है कि वो काश ‘काश’ ही रह जाता.

मस्त विचार 3948

“रास्ते” तो हर तरफ हैं, “निर्भर” आप _ पर करता है कि

_ “पार” करना है या “इंतेज़ार” करना है..

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