मस्त विचार 4087
” जाया करो गरीबों की बस्ती मे कभी कभी,
कुछ भी नहीं तो शुक्र-ए-खुदा सीख जाओगे “…
कुछ भी नहीं तो शुक्र-ए-खुदा सीख जाओगे “…
_ धूल चेहरे पर थी ..और हम आईना साफ करते रहे..
_क्या पता था ..रहनें कों पत्थर ही आएगें.
_ कुछ तुम बदलकर देखो कुछ हम बदलकर देखें.
_आज फिर तुमको…. मेरे ऐब दिखाई देंगे ..!!
We see others’ faults but why not ours ?
तेरे साथ तो हम मरने के बाद भी रह लेंगे.…।