मस्त विचार 4174

वो पत्ता आवारा न बनता तो क्या करता.

_ न हवाओ ने बख्शा, न टहनियों ने पनाह दी..

पत्तों ने रंग बदला और वो गिर गए,

_ वरना पेड़ को संभालने में कोई दिक्कत नहीं थी.!!

पेड़ की शाख से पत्ता टूट कर गिरा है या रूठ कर..

_ कौन जानता है, खैर !!…

पत्तों ने जब भी रंग बदला है, हमेशा ज़मीन पर ही गिरे हैं.!!
पेड़ हूँ हर रोज़ गिरते हैं पत्ते मेरे, फिर भी हवाओं से बदलते नहीं रिश्ते मेरे !!
रूठ कर जायेंगे तो लौटेंगे जरूर, टूट कर गए तो फिर मुमकिन नहीं !!

मस्त विचार 4170

लोग अफ़सोस से कहते है की कोई किसी का नहीं,

_ लेकिन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए !!

अपनी नादानी पर अफ़सोस करने की बजाए ऐसा सोचो कि..

_ क्या पता आपके लिए वो सबक ज़्यादा जरूरी था..!!

अपनी ज़िंदगी पर ध्यान केंद्रित करने में आपको कभी भी अफ़सोस नहीं होगा.!!
आपका दिल साफ़ है तो इस बात का कभी अफ़सोस मत करना,

_ आपके द्वारा किया गया हर कर्म दोगुना चौगुना होकर आपके पास वापस ज़रूर लौटेगा.!!

error: Content is protected