मस्त विचार 4093

अपनों का व्यवहार किसी अपरिचित सा जान पड़ता है ;

खैर अब मुझे अभ्यास हो चुका कि अपनों को अपना ना समझने में ही भलाई है..

मस्त विचार 4090

यहां हर शख्स मुसाफिर है, __एक दिन यादों से भी चला जाता है..!!
मुसाफिर हूँ मैं भी मुसाफिर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी.!!
किसी के लिए कितना भी कर लीजिए..

_पर वो याद वही रखेगा ..जो आप कर नहीं पाये..!!

मस्त विचार 4089

औरों से क्या गिला शिकवा करना, _ अब तो अपने भी हाल नहीं पूछते..
ज़िन्दगी बीत जाती है.. _ अपनों को अपना बनाने में..!!
जब हिसाब लगाने की बारी आई तो पता चला की सबसे ज़्यादा दर्द..

_ ग़ैरों के मुक़ाबले अपनों से ही मिलता है.!!

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