मस्त विचार 3917

भीगी नहीं थी कभी मेरी आँखें वक्त की मार से,

तेरी जरासी बेरुखी ने हमें जी भर के रुला दिया..!!

मस्त विचार 3916

बंद “तकदीर” के “तालें” वहीं लोग खोलते हैं ,

जिन्होंने अपने “हुनर” से “चाबी” बनाई होती हैं…..।।

अफ़सोस कि _बहुत कम लोग होते हैँ..

_जो गहराई में जाकर _ सही मायने में सोचने-समझने का हुनर रखते हैँ…!!

बहुत कम लोग ही जीवन की गहराई देख पाते हैं,

_ क्योंकि ज़्यादातर लोग ऊपरी सतह पर ही जीते हैं.!!

ठाले से बेगार भली, ये बेगार कभी बेकार नहीं जाती..

_अपने अंदर कोई हुनर लाएं और वो हुनर हमेशा साथ देगा !!

हो सकता है कि आप में दूसरों से कम हुनर हो,

_ लेकिन हार न मानने का हुनर आपको उनसे अलग बनाता है !!

मस्त विचार 3913

लंबा धागा और लंबी जुबान केवल समस्याएं ही पैदा करती है…..

….इसलिए धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर ही रखना चाहिए.

” जुबान ” सबकी होती है, कोई बात करता है कोई बकवास.

_ करने दो जो बकवास करते हैं, खाली बर्तन ही आवाज़ करते हैं.

जिसका दिमाग ज्यादा नहीं चलेगा, उसकी जुबान बहुत चलती मिलेगी ;

_ पढ़ा-लिखा इंसान ज्यादा तू-तू मैं-मैं नहीं करता.!!

जिनकी जुबान तीखी होती है, वे अपना गला खुद ही काट लेते हैं.!!

मस्त विचार 3912

ख्वाहिशें कम हों तो पत्थरों पर भी नींद आ जाती है,

_ वरना मख़मल के बिस्तर भी चुभने लगते हैं.

वो नींद ही अलग होती है, जो बुरी तरह रोने के बाद आती है…!
जब हम सुरक्षित महसूस करते हैं, तो हम आसानी से और गहरी नींद सो पाते हैं.!!
‘नींद भी क्या चीज है’

_ जब चाहिए हो तो आती नहीं, जब नहीं चाहिए तो जाती नहीं..!!
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