मस्त विचार 4711
लोग दूसरों से ऐसे बात करते हैं, जैसे बरसों से जानते हैं,
अपनों की बात आती है, तो ऐसा लगता है ” जैसे कुछ जानते ही नहीं “
अपनों की बात आती है, तो ऐसा लगता है ” जैसे कुछ जानते ही नहीं “
ये हुनर है मेरा, हक़ीक़त नहीं…
उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*
किसी की कहानी में शायद मैं भी गलत हूँ….
बज तो रहा है मगर ….फिर भी बेआवाज़ है….