मस्त विचार 4793
पैर में लगने वाली चोट…संभल कर चलना सिखाती है..
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
बुझ जाऊँगा किसी रोज़, सुलगते सुलगते…।
साँसों का भी कोई हिसाब रखता है क्या !!
आप भी कभी मुझे अपनाते तो अच्छा लगता !!
वरना मेरी उम्मीद बढ़ती ही जा रही थी..
#बस_ तू _साथ_दे_मेरा_मैं_अकेला_ही_काफी_हूँ..