मस्त विचार 4813
फेंका था जिसे हमने कल, कचरा समझ के
सुना है किसी के घर का वो सामान हो गया..
सुना है किसी के घर का वो सामान हो गया..
क्या खबर थी उन्हें हम से दूर जाने का बहाना मिल गया..
पर जो मौज में जीना चाहते हैं _ वो शिकायत नहीं करते..
दौर बुरा हो सकता है _ जिन्दगी नहीं..
वक़्त बतायेगा की सोना थे या फ़क़त मिट्टी थे हम.”
काँच टूटता है तो कुछ टुकड़े समेटने में नहीं आते ..!!