मस्त विचार 4812

हम तो रूठे थे कि वो मना लेंगे अपना समझ कर,

क्या खबर थी उन्हें हम से दूर जाने का बहाना मिल गया..

मस्त विचार 4809

“चाक़ पर हैं या फिर कसौटी पर कसे हुए हैं,

वक़्त बतायेगा की सोना थे या फ़क़त मिट्टी थे हम.”

मस्त विचार 4808

बिखरने का सबब क्या कहें यारों किसी से अब,

काँच टूटता है तो कुछ टुकड़े समेटने में नहीं आते ..!!

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