मस्त विचार 4687
न आकाश समाप्त होता है और न धरती ।
सिर्फ़ पाँववालों की दौड़ शेष हो जाती है..
सिर्फ़ पाँववालों की दौड़ शेष हो जाती है..
_ पँखों को खोल.. जमाना सिर्फ उड़ान देखता है.!!
देख तुझ पर ना कहीं… वक्त बुरा आ जाये.
जिसमें खिले हैं फूल, वो डाली हरी रहे.
” जिन्दगी ” के ” समंदर ” में हमेशा ” तुफान ” नहीं रहते…!!
तो कुछ पल सुकूँ से जी लेते हम भी…