मस्त विचार 3681

क्या अब भी मैं तुम्हें याद हूं

क्या अब भी तुम मुझे याद हो

पहले बहुत पहले सबसे पहले आते थे तुम

अब भी हो लेकिन सब के बाद आते हो …

मस्त विचार 3677

मिलेगी परिंदों को मंजिल ये उनके ‘पर’ बोलते हैं,

_ रहते है कुछ लोग ख़ामोश लेकिन उनके हुनर बोलते है.

ख्वाब तो परिंदों के होते हैं आसमान छूने के,

_ इंसान की नस्ल तो बस गिरने गिराने में लगी है..!!

उड़ना तो हर कोई चाहता है लेकिन आसमान हुनर पहचानता है..!!

मस्त विचार 3676

एक कायदा सा हो गया है

किसी को अच्छा या किसी को बुरा कहना,

मानो इन छोर के बीच जैसे कुछ है ही नहीं…

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