मस्त विचार 3675
क्यूं शर्मिंदा करते हो रोज हाल हमारा पूछ कर,
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है.
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है.
अपने ही क्यों दे रहे हैं जख्म, इस बात से हैरान हूँ मैं.
कभी – कभी ज्यादा नेकी भी सज़ा लाजवाब दिलाती है.
मन से निर्मल हो नहीं पाते, रोज- रोज गंगा नहाने वाले.
लेकिन यार, बात – बात पर रंग बदलें, इतने भी रंगीन नहीं हैं हम.
_ कि आप पत्थर के बने हैं या शीशे के.