मस्त विचार 3839
तुम मेरी जिंदगी में कहीं नहीं हो…
_ फ़िर भी मैं रोज़ तेरी राह क्यूँ तकता हूँ.
_ फ़िर भी मैं रोज़ तेरी राह क्यूँ तकता हूँ.
_मैंने कितने आँसू बहाएं हैं तुम्हारे लिए…
_ पर कहीं न कहीं उंगली उठ जाती है अपनों पर..
_ हमारी ही खताओं ने ज़रूर, इन्हें बुलाया होगा.