मस्त विचार 3809
मंजिल का कुछ पता नहीं, लेकिन राहों ने चाहा तो फिर मिलेंगे कहीं..
अजीब तरह से गुज़र रही है ज़िंदगी,
_सोचा कुछ हुआ कुछ चाहा कुछ मिला कुछ..
_सोचा कुछ हुआ कुछ चाहा कुछ मिला कुछ..
_ आज फिर किसी ने कहा- मेरा ऐतबार कीजिए.
_ जो बताना चाहते हों मन की बात..
_ इंसानियत भी अदा हो गयी, फ़र्ज़ भी पूरा हो गया ….
वो समुन्दर पर भी पत्थरों के पुल बना लेते हैं.
_आपके अंदर की सारी प्रतिभा व्यर्थ है….