मस्त विचार 3803
वो दौर भी आया जिंदगी में ,,जब मुझे,
अपनी ही पसंद से नफरत हुई.
अपनी ही पसंद से नफरत हुई.
बस उन्हें शर्मिंदा करना मेरे मिजाज़ में नहीं.
छीले इतने गए कि खंज़र हो गए…!!
_ सब रोशन करने के लिए सूरज की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है.
_ जो सूर्य से प्रेम करता है वह दीपक से संतुष्ट नहीं होता.