मस्त विचार 3747
लाखों अदाओं की अब जरुरत ही क्या है…
जब वो फ़िदा ही हमारी सादगी पर है.!
जब वो फ़िदा ही हमारी सादगी पर है.!
_ मैं ” मैं ” हूँ किसी शहर का अखबार नहीं..
बहुत हिम्मत चाहिए खुद को खुद से रोकने के लिए..
लेकिन बदलते हुए अपने कभी अच्छे नहीं लगते !!
_ गुनाहों पर अपने परदे डालकर, कहते हैं ज़माना बड़ा खराब है..!!
_ चालाक लोग तो चापलूसी से अपना काम निकालते हैं..!!