मस्त विचार 3797
बदला नही हूँ मैं, मेरी भी कुछ कहानी है ;
बुरा बन गया हूं मै, मेरे अपनों की मेहरबानी है.
बुरा बन गया हूं मै, मेरे अपनों की मेहरबानी है.
_जैसे चुभने की फ़िक्र में काँटा शाख़ से ख़ुद ही टूट जाता है.
उतना उतना मानता गया कि वाकई, मैं तो कुछ नहीं जानता”.
_ जिंदगी हमको बस ऐसे ही आजमाती रही..!!
_ अपने दुश्मनों को तो यूँ ही हरा देता हूँ..!!!