मस्त विचार 4617
” मैं पत्थर हूँ कि मेरे सर पे ये इल्ज़ाम आता है,
_ आईना कहीं भी टूटे, मेरा ही नाम आता है.!!”
हर जगह ‘पत्थर’ मारना जरूरी नहीं,
_ कभी-कभी ‘किनारा’ कर लेना ही समझदारी है.!!
_ आईना कहीं भी टूटे, मेरा ही नाम आता है.!!”
_ कभी-कभी ‘किनारा’ कर लेना ही समझदारी है.!!
बोलने से ज़्यादा करके दिखाने में आपका भरोसा होना चाहिए ”
बिना किसी जुर्म के, मैंने खुद को बंद कर रखा है..!!
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “