मस्त विचार 4713
सुनों, वक़्त की ये जो मार सह रहे हो न तुम,
डरना नही यारा, धीरे धीरे निखर भी रहे हो तुम..
डरना नही यारा, धीरे धीरे निखर भी रहे हो तुम..
देखना नदियां खुद ही मिलने आएंगी..
अपनों की बात आती है, तो ऐसा लगता है ” जैसे कुछ जानते ही नहीं “
ये हुनर है मेरा, हक़ीक़त नहीं…
उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*