मस्त विचार 3278
बदलते मौसम के ढांचे में ज़िंदगी को ढाल लीजिए जनाब, _
_ वरना इस अनजानी दौड़ में वक़्त बहुत आगे निकल जाएगा ..
_ वरना इस अनजानी दौड़ में वक़्त बहुत आगे निकल जाएगा ..
_ खुदा से ज़िन्दगी खरीदने की औकात तो आज भी नहीं है..
जो पसंद आए उसे अपने अंदाज़ से और जो ना पसंद आए उसे नज़र अंदाज़ से.
_ जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है.
_ दूसरों का मुँह ताकना शर्म की बात है.
_ क्या पता कल को _ अपने हाल पर रोना पड़ जाए !!