मस्त विचार 3398
गुनाह तुमने कुछ ऐसे कर दिए अनजाने में,
_ फूलों का क़त्ल कर बैठे, पत्थरों को मनाने में !!
_ फूलों का क़त्ल कर बैठे, पत्थरों को मनाने में !!
_ आखिर में हुकुम का इक्का……. कुदरत ही फेंकती है….
_ नाविक की धैर्य परीछा क्या, जब धारा ही प्रतिकूल न हो !!!
_ जिस का काम बोझा सर पे हो,