मस्त विचार 3492
मैं मंजिल की तलाश में मुशाफिर बना मगर,
_ छोड़ कर अजनवी मोड़ पर “अपने” चले गए !!
_ छोड़ कर अजनवी मोड़ पर “अपने” चले गए !!
_ मैं कई अपनों से वाकिफ हूं, जो पत्थर के बने हैं !!
_ सच यही कि ज़िन्दगी, ना जीत है ना हार है.
_ और मन को लगने वाली चोट समझदारी से जीना सिखाती है..
_ जो खूबसूरत तो बहुत है मगर है बहुत दूर..