मस्त विचार 3208

शहर के हर शख्स ने वसीयत में शराफ़त पाई है,

हैरान हूँ मैं सोचकर फिर बेईमानी कहां से आई है.

मस्त विचार – यार से ऐसी यारी रख – 3207

यार से ऐसी यारी रख, दुःख में भागीदारी रख,

चाहे लोग कहे कुछ भी, तू तो जिम्मेदारी रख,

वक्त पड़े काम आने का, पहले अपनी बारी रख,

मुसीबते तो आएगी, पूरी अब तैयारी रख,

कामयाबी मिले ना मिले, जंग हौंसलों की जारी रख,

बोझ लगेंगे सब हल्के, मन को मत भारी रख,

मन जीता तो जग जीता, कायम अपनी खुद्दारी रख.

मस्त विचार 3206

खुश लोग इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि उनके पास क्या है.

दुखी लोग इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि उनके पास क्या नहीं है.

मस्त विचार 3204

कभी कभी देर से सही _ पर खोई हुई चाभी मिल जाती है,

लेकिन अफसोस _ तब तक हम अपना ताला बदल चुके होते हैं…

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