मस्त विचार 4701
उस बूढ़े बरगद के आस पास के सारे दरख़्त काट दिए गए…
वह अकेले कैसे जीता होगा.. यही सोच कर सिहर जाता हूँ…!!
वह अकेले कैसे जीता होगा.. यही सोच कर सिहर जाता हूँ…!!
सामने वाले की यहाँ सुनना कौन चाहता है ?
पर कभी कभी लगता है ऐसे…हम एक दूसरे को मिल जाते तो होता बेहतर सबसे !
जिस दिन समझदार बन गया..सह नही पाओगे…
कोई उफनते समंदर से निकल आता है तो कोई किनारों पे डूब जाता है “
बोल पाना आज भी मेरे वश की बात नहीं….