मस्त विचार 4639
चुप- चाप चल रहे थे ज़िन्दगी के सफ़र में,
तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गये..!!!
तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गये..!!!
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..
_ जो छोड़ना सीख गया, वही नए साल को सच में जी पाता है.
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है..!!
लोग बात को पकड़कर इंसान को छोड़ देते हैं !
वर्ना उसको अपनी मंज़िल का पता नहीं मिलता..