मस्त विचार 4720

लम्बी चौड़ी बातें फेकना कतई नहीं पसंद,

_ बस जो भी हुँ अपने दम पर हुँ ” यही मेरे लिए काफी है “

हम सिर्फ़ अपनी पसंद से नहीं पहचाने जाते..
_ बल्कि जिन चीज़ों को हम स्वीकार नहीं करते, वे भी हमें परिभाषित करती हैं.
हमारी पसन्दीदा चीज़े दरअसल हमारी हद बयां करती है,
_ कि हमने इस से बेहतर अभी आगे कुछ अनुभव नही किया.!!

– कई बार हम पसन्दीदा चीज़े इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि हमने बेहतर नहीं देखा.
_ और कई बार बेहतर देखने के बाद भी वही पसंद रहता है, क्योंकि वह हमारे स्वभाव से मेल खाता है.!!

मस्त विचार 4718

” जिंदगी तो खूबसूरत ही थी “,

कमबख्त अगर हम ही इसे जीना ना सीख पाएं तो

इसमें जिंदगी की क्या गलती.

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