मस्त विचार 2922
*हक़ीकत की भीड़ से..* *कुछ गुमशुदा सपने.. ढूँढ रहे हैं ..!!*
*आज- कल हम अपनो में ..* *कुछ अपने.. ढूँढ रहे हैं ..!!*
*आज- कल हम अपनो में ..* *कुछ अपने.. ढूँढ रहे हैं ..!!*
मुझे अहसास रहने दो मेरी अपनी भी हस्ती है.
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब जहाँ जो मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाइश न की.
नादानी और तजुर्बे का बंटवारा हो रहा है !!
गुरूर की जंग में अक्सर जुदाई जीत जाया करती है…!