मस्त विचार 4615
खुद से ही रिहा हो जाऊँ इतनी तम्मना है मेरी,
बिना किसी जुर्म के, मैंने खुद को बंद कर रखा है..!!
बिना किसी जुर्म के, मैंने खुद को बंद कर रखा है..!!
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “
मै जैसा था फिर मुझे वैसा कर दो ।।