मस्त विचार 3071

हम तो हैं उन फूलों जैसे, जो कांटों में जी लेते हैं.
कितनी ही बर्फ गिरे, आएं कितनी ही आँधियाँ ;

_वो फूल खिल के रहेंगे, जो खिलने वाले हैं..

मस्त विचार 3067

अपने गिरने से लेकर उठने तक की कहानी इन पन्नों में उतारी है,

आप सब तो सिर्फ सुनते हैं हमने सच में ऐसी जिंदगी गुजारी है.

मस्त विचार 3066

मुंह में जुबान सबके होती है,; _ पर कमाल तो वो लोग करते हैं

_ जो लोग इसे संभाल कर रखते हैं..

हाथों में पत्थर नहीं, फिर भी चोट देती है ;

ये जुबान भी अजीब है, अच्छे – अच्छों के घर तोड़ देती है..

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