मस्त विचार 2869
*कभी साथ बैठो..* *तो कहूँ कि दर्द क्या है…*
*अब यूँ दूर से पूछोगे..* *तो ख़ैरियत ही कहेंगे…*
*अब यूँ दूर से पूछोगे..* *तो ख़ैरियत ही कहेंगे…*
_ मुस्कुराएगा फिर वही जिसे ज़िन्दगी से आस है !!
_ ” हया ” के दायरे में रह कर ,,,, ” इकरार ” किया है हमने !!
#क्योंकि_ढलान_भी_वहीँ_से_शुरू_होती है.
_ कोई भी कमज़ोर क्षण वस्तुतः कमज़ोर नहीं होता, वह हमें एक मज़बूती की ओर ले जाता है.
आप सुखी न हो पाओ इसके वो सारे उपाय करता है,
कोई लिख रहा है तो कोई पढ रहा है.