मस्त विचार 3122
गर जो तूफ़ान कोई तेरे अंदर है,
वो एक कतरा भी, फिर समुन्दर है…
ज़िन्दगी में है तूफ़ान और ना ही धूल छंट रही है..
_ पर हर कोई कहता कि ‘हम ठीक हैं’
वो एक कतरा भी, फिर समुन्दर है…
_ पर हर कोई कहता कि ‘हम ठीक हैं’
वरना ज़ख्म इतने हैं की ठीक से रोया भी नहीं जाता.
इन छोटी छोटी बातों से हार जाऊं वो इंसान नहीं हूं मैं.
लोग खामोश होते हैं पर नासमझ नहीं…!!
नए मौसम का पता बता, _ जो गुजर गया, वो गुजर गया…