मस्त विचार 2857
मीलों का सफर एक पल में बर्बाद हो गया,
जब अपनों ने कहा – कहो कैसे आना हुआ.
जब अपनों ने कहा – कहो कैसे आना हुआ.
खुद से मिलने की सारी लाइने व्यस्त है.
तुमने तो हमे उम्र भर का मुसाफिर बना दिया.
इक तेरी मुह्ब्ब्त ही काफ़ी है दुनियाए- सरकार हमको.
मगर मेरे अनुभव मुझे इसकी इजाज़त नहीं देते.
तब कहीं जाकर अपने पास आ पाए हैं.