मस्त विचार 2828
“बहुत बदनसीब होते हैं वो लोग,
जो इतना सा भी याद नहीं रख पाते कि, सांच को आंच नहीं, “
जो इतना सा भी याद नहीं रख पाते कि, सांच को आंच नहीं, “
बेघर हो गए हैं कमाते कमाते.
मौत के नखरे तो देखो आते ही कह दिया : “मुझे चार कँधे चाहिए…”
कि कोई अपना नहीं होता…
कि उड़ने को पंख भी थे _ ये भी भूल गये ..
_ लेकिन पाकर खो देने वालों की तादाद भी कम नहीं है !!