मस्त विचार 2827
मेहमान की तरह घर से आते जाते,
बेघर हो गए हैं कमाते कमाते.
बेघर हो गए हैं कमाते कमाते.
मौत के नखरे तो देखो आते ही कह दिया : “मुझे चार कँधे चाहिए…”
कि कोई अपना नहीं होता…
कि उड़ने को पंख भी थे _ ये भी भूल गये ..
_ लेकिन पाकर खो देने वालों की तादाद भी कम नहीं है !!
मेरे अंदरूनी मन की खबर रखता है,
शायद की मैं उसे भुला देता मगर,
याद आने के वो सारे हुनर रखता है।।।।।।