मस्त विचार 2721
ऐ ~ दुःख ! कुछ तो रहम कर मुझ पर….
मैं तेरा रोज का ग्राहक हूँ….
मैं तेरा रोज का ग्राहक हूँ….
लोग अपने किरदार में फ़रिश्ते हों जैसे.
फिक्र तो वो करें, जो बोलते कुछ हैं, करते कुछ हैं,
दिखते कुछ हैं और होते कुछ हैं.
बेहतरीन दिनों के लिए बुरे दिनों से लड़ना पड़ता है.
सुना है कम बोलने से बहुत मसले सुलझ जाते हैं.
_ वह असल में एक नई शुरुआत हो सकती है ..