मस्त विचार 2920
लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर,
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब जहाँ जो मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाइश न की.
मैंने दर्द की अपने नुमाइश न की,
जब जहाँ जो मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाइश न की.
नादानी और तजुर्बे का बंटवारा हो रहा है !!
गुरूर की जंग में अक्सर जुदाई जीत जाया करती है…!
और मरे लोगों की तारीफ होती है.
जब तक मैं जीत नहीं जाता.