मस्त विचार 4668
कहना तो बहुत कुछ था तुमसे,
पर,
तुम सुनने के लायक ही नही रहे।।।
पर,
तुम सुनने के लायक ही नही रहे।।।
जो जमीं के नहीं होते वो कहीं के नहीं होते.
हम ”ज़रूरत” थे ”ज़रूरी” नहीं..
किसी के थोपे हुए नकारात्मक विचार भी अब मुझे प्रभावित नहीं करते…!!
कल बहुत देर हो सकती है.
समझ लो और इम्तिहान है इसके आगे..