मस्त विचार 2860
परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की…
हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है.
हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है.
थोड़ी जी कर देखिए, पूरी समझ में आ जाएगी.
_ सिर्फ़ सूरज के चमकने से ही सवेरा नहीं होता….
_ उन्होंने अपने पांव नहीं ख़यालात बदले थे..!!
जब अपनों ने कहा – कहो कैसे आना हुआ.
खुद से मिलने की सारी लाइने व्यस्त है.
तुमने तो हमे उम्र भर का मुसाफिर बना दिया.