मस्त विचार 2854
ना शोहरत, ना ताकत,ना इज़्ज़्त कि दरकार है हमको,
इक तेरी मुह्ब्ब्त ही काफ़ी है दुनियाए- सरकार हमको.
इक तेरी मुह्ब्ब्त ही काफ़ी है दुनियाए- सरकार हमको.
मगर मेरे अनुभव मुझे इसकी इजाज़त नहीं देते.
तब कहीं जाकर अपने पास आ पाए हैं.
लोग गलतफहमी में हैं, कि शायद कहीं मरहम बिकता है...
जिन्दगी को ख़ुशी का नजारा मिला.
एक ही पल में सारे चाहने वालों के चेहरे से पर्दा हटा देता है.