मस्त विचार 2580
जिंदगी तेरे भी नखरे गजब हैं,
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
जहां से चले थे फिर वहीँ आ गए हम..
कोई मेरा रास्ता रोकने की कोशिश कर सकता है…
लेकिन मेरी मंजिल और काबिलियत नहीं….
और शाम होते-होते, मेरा आज भी चला गया.
. . .
यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नही….!!
मेरी मुट्ठी से हर इक जुगनू निकल जाता है क्यूँ.