मस्त विचार 4476
हर शख्स परिंदों का हमदर्द नहीं होता दोस्तों,
बहुत बेदर्द बैठे हैं दुनिया में जाल बिछाने वाले.
बहुत बेदर्द बैठे हैं दुनिया में जाल बिछाने वाले.
पर दर्द जगाता भी है,,,ये सब नहीं जानते,,,
आप मुझसे सीखिए कि जिन्दा रहकर हर ग़म को कैसे पीते हैं.
ना खुश हूँ ना उदास हूँ, बस ख़ाली हूँ और खामोश हूँ.
जिनके लिए हम पूरी दुनिया को भूल जाते हैं.
बिछड़ने का …कोई रिवाज़ ना हो…