मस्त विचार 2562
जिस घर को बनाने में जिंदगी लगा दी..
आज उसी घर में रहने से बैचेन है इंसान…
आज उसी घर में रहने से बैचेन है इंसान…
तुम भी उठाओ “हाथ” के मौसम “दुआ” का है.
मिली तो इस “शर्त” पे कि किसी से ना मिलो..!!
“ज़िन्दगी एक सफ़र है, आराम से चलते रहो
उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगें, बस गियर बदलते रहो”
पर…उनको मेरी जरुरत होती तब…
बरसों से पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया.