मस्त विचार 2795
यु तो सब अपने संग हैं ..!!
फिर भी ना जाने क्यों अकेला सा मन है…!!
फिर भी ना जाने क्यों अकेला सा मन है…!!
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे.
मैंने चुप रहके बाज़ी पलट दी.
लोग अक्सर दूसरों का सामान खो देते हैं.
बिना अल्फ़ाज़ों के कहती हैं बड़ी गहरी बातें।
हैं बादल भी मेरे हमराज़ सुनते हैं वो भी मेरी बातें,
चुपके से वो कहीं दूर फिर बरसा जातें हैं राज़ की बातें।
जब अपनों से उम्मीद कम हो गयी.