मस्त विचार 2737
शिकवा नहीं शुकराना सीख गए,
तेरी संगत में खुद को,,,,,,,झुकाना सीख गए,
पहले मायूस हो जाते थे,,,,,,,कुछ ना मिलने पर,
अब तेरी रज़ा में,,,,,,राज़ी रहना सीख गए,,,,!!
तेरी संगत में खुद को,,,,,,,झुकाना सीख गए,
पहले मायूस हो जाते थे,,,,,,,कुछ ना मिलने पर,
अब तेरी रज़ा में,,,,,,राज़ी रहना सीख गए,,,,!!
कभी खुदा की रजा समझ कर…
कभी अपने गुनाहों की सजा समझ कर.
कौन छूता है इस जमीन को, आसमान से टूट कर…
वो किसी की परछाई बनने में नहीं !!
जब सबको ही मेरे रब ने बनाया.
देख कर दिलों में भेद की दीवार,
कभी मैं रोया कभी मुस्कुराया.
हर वक़्त वाह वाह की ख्वाहिश नहीं होती.