मस्त विचार 2801
जरा अदब से गुजरिए हमारे जेहन से जनाब,
हमारी खामोशियों का भी अपना रुतबा है….
हमारी खामोशियों का भी अपना रुतबा है….
तुमसे भी बहुत मजबूर इंसान है इस जहां में !!
अब तो, गाड़ी, कपड़े और जूते लोगों की औकात तय करते हैं.
वो साथ भी नहीं और हम आजाद भी नहीं.
तुम्हें वो कबूल क्यों नहीं जो मैं हूँ ?
*मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है उतना ही ऊपर उठता है”…।*
_ भय, क्रोध व शोक चेहरे को विकृत बनाते हैं.
प्रसन्नता और विनम्रता से चेहरे का सौंदर्य बढ़ता है.
एक वक्त के बाद हम खोई चीज़ों का शोक भी नहीं मनाना चाहते हैं.!!