मस्त विचार 2509
कुछ उम्मीदें, कुछ सपनें, कुछ महकी- महकी यादें,
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ.
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ.
पर गम देने वाले भी अजनबी नहीं होते…
जीवन है विपरीत आयामों में खुद को ढाल लेना.
*वो उन लोगों की भी इज्जत करता है*,
*जिनसे उसे किसी किस्म* *के* *फायदे की उम्मीद* *नही* *होती..
नसीब बिगड़ा तो… गूंगे बुराई करने लगे
हमारे क़द के बराबर न आ सके जो लोग हमारे पाँव के नीचे खुदाई करने लगे ….!!!
और” असफलता” को अपना नसीब.