मस्त विचार 2557
शहरों का यूँ वीरान होना कुछ यूँ ग़ज़ब कर गया,
बरसों से पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया.
बरसों से पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया.
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साये हैं.
अब तू ही बता अब इस से ज़्यादा और कैसे चाहूँ तुझे..
जिस दिन पत्थर बना, लोगों ने देवता मान लिया.
टूट अगर हम गए तो बिखर तुम भी जाओगे.
लेकिन पता सब है कि कौन कितने पानी में है.