मस्त विचार 2747
पर्वत कुछ भी नहीं हैं, बस पत्थरों की एकता है.
जो हल्के लोग होते हैं, हर वक्त बातें भारी भारी करते हैं..
_ तो समझना, मजबूत बनने की जिद में टूट रहा है कोई ..
हम आदते बदलते हैं तो तुम शर्तें बदल देती हो.
खुद से हो ……या…..किसी और से…..
ज़िक्र तेरा ज़रूर होता है.
न चालाकी से कुछ मिलनेवाला है.