मस्त विचार 2689
गिनती मत करना मेरे गुनाहों की,
बेगुनाह हो कर भी “मैंने” सजायें भुगती हैं.
बेगुनाह हो कर भी “मैंने” सजायें भुगती हैं.
लेकिन सिर्फ बातों से.
_ हम दोनों के बीच कई _पन्नों का फासला होगा..!
वफादार तो हमेशा तन्हां ही मिलते हैं…
उसने एक छोटी भूल की..
और हमने वो याद रखकर बड़ी भूल की..!
मैने डुबो के कश्ती अपनी… तू़फां की लाज रख ली…