मस्त विचार 2753
*मुस्कुराने की आदत भी कितनी महेंगी पड़ी हमको……..*
*भुला दिया सबने ये कहकर की तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो……..*
*भुला दिया सबने ये कहकर की तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो……..*
आज फिर कोई कह रहा था ” समझदार हो तुम “
हम ही ढूंढ़ते हैं उसे महंगी दुकानों में..
आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है …
समझाने जितना आसान होता…!!
_ फिर कैसा इतराना ..