मस्त विचार 2695
सही वक़्त पर करवा देंगे हदों का एहसास,
कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं.
कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं.
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढ़ती रही.
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ.
आज का ये दिन इक उम्र बन के गुज़रा है..!!
कुछ हक़…..दिए नहीं जाते…..लिए जाते हैं..
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं.