मस्त विचार 2456
आग अपने ही लगा सकते हैं,
ग़ैर तो सिर्फ हवा देते हैं.
ग़ैर तो सिर्फ हवा देते हैं.
अब उसको कर रहा हूँ …. जो कहता रहा हूँ.
शब्दों ने जहर पी लिया और खामोशियों की उम्र बढ गई.
पर कौन जाने इस लंबे सफ़र में, कोई और पेड़ मिले ना मिले…
*परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए…*
थोडा आहिस्ता चल… समझने तो दे,
ये पड़ाव है या है मंजिल मेरी.